AKTV | ट्रेडिंग एजुकेशन
Read in English → Risk Management: Why New Traders Lose All Their Capital
Table of Contents
ट्रेडिंग में लॉस का सबसे बड़ा कारण
दोस्तों, ट्रेडिंग में लॉस का सबसे बड़ा कारण यह है कि नए-नए ट्रेडर्स बिना किसी Risk Management के अपना पैसा मार्केट में झोंक देते हैं। शुरुआत में मार्केट उन्हें कुछ आसान प्रॉफिट देकर सरप्राइज़ करती है। लेकिन एक दिन शेयर मार्केट का तूफ़ान उनके प्रॉफिट के साथ-साथ उनकी सारी कैपिटल को भी साफ़ कर देता है।
आज हम बिना किसी फालतू बकवास के आपको बताएंगे कि कैसे आप सेफली, कम से कम लॉस के साथ, अपने रिस्क को मैनेज करते हुए छोटी कैपिटल से भी बड़ा प्रॉफिट कमा सकते हैं।
Risk Management क्या होता है?
दोस्तों, Risk Management एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें ट्रेडर अपने लॉस को इस तरह से कंट्रोल करते हैं कि किसी भी अजीबोगरीब मार्केट मूवमेंट में उनकी पूरी कैपिटल न गंवा बैठें।
असल में सारे नए ट्रेडर्स सबसे पहले प्रॉफिट के बारे में सोचते हैं, लेकिन उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं होता कि इसमें वो अपना पूरा पैसा भी खो सकते हैं। जब मार्केट उनके अगेंस्ट चलने लगती है तो वो हड़बड़ा जाते हैं, और किसी चमत्कार की आस में वेट करते रहते हैं। अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है तो नीचे कमेंट करके हमें बताएं।
स्मार्ट ट्रेडर बनाम झंडू ट्रेडर
यहाँ पर सपोर्ट एरिया के पास रिवर्सल का माहौल बन रहा है। मान लो यहाँ पर दो ट्रेडर्स सेम कैपिटल ₹50,000 लेकर ट्रेड में घुसते हैं।
पहला ट्रेडर स्मार्ट है और रिस्क मैनेजमेंट को फॉलो करते हुए 2% कैपिटल का रिस्क लेते हुए स्टॉप लॉस शुरुआत से ही अपने दिमाग़ में रखता है।
दूसरा ट्रेडर झंडू है, वो बिना किसी रिस्क मैनेजमेंट के ट्रेड में एंट्री करता है।
होता यह है कि मार्केट वहाँ से गिर जाती है। स्मार्ट ट्रेडर का स्टॉपलॉस हिट हो जाता है और रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो के हिसाब से उसको ₹1,000 का लॉस हो जाता है। वो खुशी-खुशी इसको एक्सेप्ट कर लेता है।
वहाँ पर झंडू ट्रेडर, मार्केट रिकवरी का वेट करते-करते, तब जागता है जब उसका लॉस ₹3,500 पहुँच चुका होता है।
दोस्तों, एक-आध बार तो ऐसा चल जाता है। लेकिन सपोज़ करो अगर ऐसा 3 बार होता है:
- स्मार्ट ट्रेडर को 3 ट्रेड्स के बाद ₹3,000 का नुकसान होगा।
- झंडू ट्रेडर का नुकसान ₹10,500 तक पहुँच चुका होगा, जो उसकी कुल कैपिटल का 21% है।
यह 21% का नुकसान सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं है, यह उसकी साइकोलॉजी पर भी बुरा प्रभाव डालेगा और ज़्यादा चांसेज यही रहेंगे कि वो ट्रेडिंग करना ही छोड़ देगा।
रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो
Risk Managment का अगला अहम पहलू है रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो। इसका मतलब यह होता है कि आप कितने पैसे कमाने के लिए कितने पैसे गंवाने को तैयार हैं।
फॉर एग्ज़ाम्पल, अगर एक स्टॉक की क़ीमत ₹1,000 रुपये है और हम उम्मीद करते हैं कि इसका रेट ₹1,100 तक जाएगा, लेकिन यह भी जानते हैं कि अगर बाज़ार नीचे गया तो इसकी क़ीमत ₹950 तक भी जा सकती है। तो यहाँ आपका रिस्क ₹50 है और रिवॉर्ड ₹100, यानी रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो 1:2 हुआ।
ट्रेडर्स नॉर्मली 1:2 या 1:3 का रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो फॉलो करते हैं। ऐसा करने पर अगर ट्रेडर के आधे ट्रेड्स भी घाटे में जाते हैं तो भी वो नेट प्रॉफिट में ही रहेगा।
इमोशंस पर कंट्रोल: डर और लालच
दोस्तों, जब हम ट्रेडिंग करते हैं तो हमारे दो बेसिक इमोशंस होते हैं जो डायरेक्टली हमारे ट्रेड डिसीजंस को अफेक्ट करते हैं: पहला है लालच, और दूसरा है डर।
मान लो आपने एक ट्रेड लिया है और वो आपके अगेंस्ट जा रहा है। तो नैचुरली आपको ज़्यादा लॉस ना हो जाए, इस चीज़ का डर लगने लगेगा, और आप स्टॉप-लॉस हिट होने से पहले ही पोज़िशन से बाहर निकालने की कोशिश करोगे। ऐसे में लोग मार्केट की छोटी-मोटी fluctuations में फंसकर ट्रेड से एग्ज़िट कर देते हैं और उनके बेचते ही मार्केट दोबारा ऊपर चली जाती है।
वहीं दूसरी तरफ, जब मार्केट आपके फेवर में जा रही हो तो आपके मन में लालच आ जाता है बहुत ज़्यादा प्रॉफिट लेने का। ऐसे में आप ट्रेड को अपने टारगेट पर नहीं बेचते और मार्केट के रिवर्सल में आपका कमाया हुआ प्रॉफिट भी आपके हाथ से चला जाता है।
Risk Management का पहला स्टेप यही है कि आपको अपने डर और लालच के इमोशंस को समझकर इन पर पूरा कंट्रोल रखना चाहिए। अपने ट्रेड, टारगेट और स्टॉपलॉस पर पूरा भरोसा करते हुए इन पर टिके रहना चाहिए।
पोज़िशन साइज़िंग
पोज़िशन साइज़िंग मतलब कि आपको एक ट्रेड में कितना पैसा लगाना है। यह फैसला आपकी कुल कैपिटल के बेस पर होता है।
नॉर्मली यह माना जाता है कि आपको एक ट्रेड में अपनी कुल कैपिटल का 2% से ज़्यादा का रिस्क नहीं लेना चाहिए।
सपोज़ करो आपके पास एक लाख की कैपिटल है। ऐसे में आपको एक ट्रेड में मैक्सिमम ₹2,000 का ही रिस्क लेना चाहिए। अगर आप अपनी पोज़िशन साइज़ को मैनेज नहीं करते हैं तो एक ही ट्रेड का बड़ा नुकसान आपकी कुल पूँजी को ही खा जाएगा।
Position sizing is one of the most powerful ways to manage your risk. अगर आप अपनी कैपिटल का सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही रिस्क में डालते हो तो नुकसान होने के बाद भी फ्यूचर में ट्रेड लेकर लॉस को कवर करने के लिए सफिशिएंट कैपिटल बची रहेगी।
Consistency और Discipline
Risk management का अगला अहम आयाम है consistency और discipline। इसमें आपको अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी और प्लान का पालन करना होता है, चाहे मार्केट का बर्ताव कैसा भी हो।
बहुत बार आपको फील होगा कि मार्केट आपको धोखा दे रही है, आपका मन करेगा कि प्लान को बदलकर उल्टी दिशा पकड़ लेता हूँ। लेकिन आपको यह ना करके, अपने आप पर भरोसा करना चाहिए और ट्रेड को चलने के लिए कम से कम स्टॉपलॉस तक का वक्त देना चाहिए।
मार्केट आपको खेल खिलाएगी, आपके इमोशंस को ट्रिगर करेगी, लेकिन आपको अपने स्टॉपलॉस, टारगेट, स्ट्रेटेजी और प्लान पर अडिग रहना है।
लॉस को खुशी से एक्सेप्ट करें
एक आम बात जो हर कोई जानता है, चाहे कोई कितना भी बड़ा एक्सपर्ट हो, स्टॉक मार्केट में आप हर ट्रेड में प्रॉफिट नहीं कमा सकते। आपको कुछ ट्रेड्स में लॉस तो होगा ही होगा।
बेहतर यही होगा कि आप उस लॉस को खुशी-खुशी एक्सेप्ट करें और लॉस का बुरा प्रभाव अपनी ट्रेडिंग साइकोलॉजी पर ना आने दें। ऐसा करके आप फ्रेश दिमाग से अगले ट्रेड को अच्छे से एनालाइज़ और एग्ज़ीक्यूट कर पाएंगे।
ओवरट्रेडिंग से बचें
लास्ट में हम आते हैं एक आम समस्या पर जो लगभग सारे ट्रेडर्स फेस करते हैं: ओवरट्रेडिंग।
कई बार ट्रेडर्स एक लॉस के बाद या ज़्यादा प्रॉफिट लेने के बाद ओवरट्रेडिंग करने लगते हैं यानी वो फालतू के ट्रेड्स में घुसने लगते हैं। ऐसे में या तो उनका लॉस पहले से काफी बढ़ जाता है, या वो अपने कमाए प्रॉफिट को गंवाकर दोबारा लॉस में आ जाते हैं।
ओवरट्रेडिंग का एक बड़ा कारण (FOMO Fear of Missing Out) भी है। इस लिए ट्रेड में तभी एंट्री मारें जब आपको दो से तीन कन्फर्मेशंस मिल जाएं।
साथ ही, आप जो फोकस पाँच-छह ट्रेड्स पर लगाते हो, उनकी जगह आपको सिर्फ एक या दो क्वालिटी ट्रेड्स के एनालिसिस पर ही वो लगाना चाहिए, ताकि आपके सही होने की प्रोबेबिलिटी बढ़ जाए।
निष्कर्ष
दोस्तों, आज की इस वीडियो को आप बीच-बीच में सुनते रहें, या इसके पॉइंट्स को नोट करके अपने सामने ट्रेडिंग करते हुए लगा लें, क्योंकि ऐसी छोटी-छोटी भूल ही आपको बहुत महँगी पड़ती है।
Risk Management कोई ऑप्शन नहीं है; यह सफल ट्रेडिंग की नींव है। मिलते हैं अगली वीडियो में। जय हिंद।
इसपर एक सम्पूर्ण वीडियो देखें: Click Here
Read in English → Risk Management: Why New Traders Lose All Their Capital
Written by: Ardan Kumar | Founder | aktv.in
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ शैक्षणिक कार्यों हेतु है। हम SEBI रजिस्टर्ड नहीं हैं। यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस नहीं है। ट्रेडिंग में नुकसान का रिस्क होता है।