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स्टॉक मार्केट का जाल: फेक ब्रेकआउट क्या है और इससे कैसे बचें

AKTV | ट्रेडिंग एजुकेशन


Read in English: Fake Breakout: How the Stock Market Traps Retail Traders (And How to Escape)


स्टॉक मार्केट एक जाल है: लेकिन सिर्फ उनके लिए जो इसे नहीं समझते

दोस्तों, स्टॉक मार्केट एक ऐसा जाल है जिसमें फंसकर ज़्यादातर लोग अपना पूरा पैसा गंवा बैठते हैं। लेकिन कुछ चंद लोग जो मार्केट के इस जाल को पहचान जाते हैं, वे लोग यहाँ भर भर के पैसा छापते हैं। आज हम आपको इस जाल को पहचानना एकदम आसान भाषा में समझाने वाले हैं।

दोस्तों, लगभग हर रोज़ बहुत बार ऐसा होता है कि मार्केट में एक रेज़िस्टेंस लेवल का ब्रेकआउट होता है और आप जैसे छोटे ट्रेडर्स अपना स्टॉपलॉस लगाकर ऊपर की तरफ़ ट्रेड में एंट्री लेते हैं। मार्केट यहाँ से हूटिंग ऊपर भी जाती है। लेकिन फिर थोड़े देर में मार्केट नीचे आकर आपके स्टॉपलॉस को खा जाती है। यही तो मार्केट का जाल है जिसे ट्रैप ट्रेडिंग या फेक ब्रेकआउट कहते हैं।

Fake Breakout क्या होता है?

आइए सबसे पहले ट्रैप ट्रेडिंग के बेसिक को समझते हैं। चार्ट पर एक काफी इंपोर्टेंट रेज़िस्टेंस ज़ोन है और यहाँ पर इस रेज़िस्टेंस का ब्रेकआउट होता है। जब मार्केट इस रेज़िस्टेंस के ऊपर स्कैन करती है तो छोटे ट्रेडर यहाँ अपनी एंट्री बना लेते हैं। पर होता ऐसा है कि मार्केट यहीं से वापस घूम जाती है और उनका स्टॉपलॉस हिट हो जाता है। इस चीज़ को फेक ब्रेकआउट भी कहा जाता है।

ये जो ट्रैप में अभी छोटे ट्रेडर फंसे, ये जाल ऑपरेटर्स ने बिछाया हुआ था। अब आपके मन में सवाल उठेगा कि ये ऑपरेटर्स होते कौन हैं। तो भाई साहब, ऑपरेटर बहुत बड़ी बड़ी पार्टीज़ होती हैं जो एकदम से एक टाइम पर करोड़ों रुपये मार्केट में झोंक देते हैं। इनका मेन मकसद होता है कि मार्केट को रेज़िस्टेंस तक लेजाकर ब्रेकआउट करवाया जाए।

ट्रेडिंग एक ज़ीरो सम गेम है: मतलब यहाँ एक ट्रेडर का नुकसान और दूसरे का फ़ायदा होता है। ब्रेकआउट होने पर छोटे ट्रेडर्स का पैसा खाने और उन्हें बड़े मूव में पैसा कमाने से रोकने के लिए ऑपरेटर्स उनकी अपोज़िट साइड में काफी सारा पैसा लगा देते हैं। ऐसे में छोटे प्लेयर्स का पैसा बड़े प्लेयर्स के हाथ में पहुँच जाता है।

वॉल्यूम से Fake Breakout कैसे पहचानें?

दोस्तों, इसके लिए आपको एक चीज़ पर एनालाइज़ करना बहुत इंपोर्टेंट है जो है वॉल्यूम। भले ही प्राइस हमें कुछ बताए या ना बताए लेकिन वॉल्यूम आपको पक्का बताएगा कि कोई ब्रेकआउट फेल होने वाला है या नहीं। वॉल्यूम आपको ये भी जानकारी देता है कि मार्केट में बड़े प्लेयर्स के बड़े ऑर्डर्स कब एग्ज़ीक्यूट हो रहे हैं।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि मार्केट के समुंदर में हमें हमेशा बड़ी मछली के साथ चलना है, ना कि उसके ख़िलाफ़। इसलिए हमारा वॉल्यूम को देखना बहुत ही ज़्यादा इंपोर्टेंट हो जाता है। जो लोग वॉल्यूम को इग्नोर करके सिर्फ प्राइस पर भरोसा करते हैं वो कान खोलकर सुन लो: बार बार धोखा खाओगे।

अगर आपको नहीं पता कि चार्ट पर वॉल्यूम कैसे लगाते हैं तो यह एकदम सिंपल है। आपको जस्ट इंडिकेटर वाले सेक्शन में जाकर वॉल्यूम वाला इंडिकेटर आराम से सेलेक्ट करके लगा सकते हैं। ध्यान रहे जो लोग इंडेक्स पर ऑप्शंस खरीदते हैं, उनको वॉल्यूम की जगह ओपन इंटरेस्ट पर नज़र रखनी चाहिए।

रियल ब्रेकआउट की पहचान

चार्ट में प्राइस ग्रीन कैंडल बनाते हुए ऊपर जा रहा है। एक लेवल के बाद जैसे ही प्राइस इस रेज़िस्टेंस लेवल को क्रॉस करता है, उस समय वॉल्यूम पर ध्यान दें।

आपको देखना है कि जब प्राइस ऊपर जा रहा था तो क्या वॉल्यूम की bars भी साथ-साथ लंबी हो रही थीं। अगर हो रही थीं तो यह एक अच्छा साइन है कि बायर्स में काफी मजबूती है।

वहीं पर रिट्रेसमेंट के दौरान अगर वॉल्यूम कैंडल पहले से छोटी हैं तो यह एक संकेत है कि सेलर्स मार्केट में कमज़ोर हैं।

इस रिट्रेसमेंट के बाद जब प्राइस बड़ी ग्रीन कैंडल बनाते हुए, रिसेंट हाई को ब्रेक करके स्विंग हाई के ऊपर क्लोज़ करती है, तो यहाँ पर आए वॉल्यूम को देखो। अगर यहाँ पर बनी VOLUME BARS रिट्रेसमेंट की VOLUME BARS से बड़ी है तो यह हमारे लिए एक परफेक्ट ट्रेडिंग सेटअप है जहाँ हम बाइंग पोज़िशन बना सकते हैं।

Fake Breakout की पहचान

जब प्राइस रेज़िस्टेंस लेवल को ब्रेक करके थोड़ा ऊपर क्लोज़ करता है तो हम देखते हैं कि उस समय की वॉल्यूम bars भी बड़ी होती जा रही हैं। फिर जब प्राइस वहाँ से रिट्रेस करता है तो हम देखते हैं कि यहाँ भी वॉल्यूम bars बड़ी ही होती जा रही हैं।

यह दिखाता है कि सेलर्स धीरे-धीरे मज़बूत हो रहे हैं और बड़ी क्वांटिटी के साथ मार्केट में एंट्री ले रहे हैं।

अब जब प्राइस छोटी-छोटी ग्रीन कैंडल बनाते हुए हल्का ऊपर उठता है और वॉल्यूम का साइज़ रेड वॉल्यूम bar से छोटा होने लगता है तो यह कन्फर्म करता है कि बायर्स अब कमज़ोर हो चुके हैं।

ऐसे में हमें स्विंग लो को मार्क करना होता है। अब जैसे ही प्राइस इस स्विंग लो को तोड़ते हुए नीचे स्कैन करता है और इसका वॉल्यूम भी पहले की ग्रीन कैंडल से ज़्यादा होता है, तो यह एक परफेक्ट संकेत है कि हमारा ब्रेकआउट फेल हो चुका है। ऐसे में हमें अपनी पुरानी buy पोज़िशन को क्लोज़ करके अच्छे रिस्क टू रिवॉर्ड रेशियो के साथ शॉर्ट पोज़िशन बनानी चाहिए।

वे लेवल जहाँ फेक ब्रेकआउट सबसे ज़्यादा होते हैं

इन लेवल्स को नोट करके अपने ट्रेडिंग सेटअप के सामने लगा लो:

पहला: Previous Day High और Low: पिछले दिन के हाई और लो मार्केट के लिए बहुत इंपोर्टेंट लेवल होते हैं। जब प्राइस इन लेवल्स को सीधे-सीधे बिना रुके तोड़ता है तो अक्सर fake breakout होता है।

दूसरा: Current Day High और Low: आज के दिन का सबसे ऊपरी और नीचला लेवल भी fake breakout का कारण बन सकता है। जब प्राइस बिना कंसोलिडेट किए इन लेवल्स को तोड़ता है तो ब्रेकआउट के फेक होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।

तीसरा: Psychological Round Figure Levels: 26000, 25500 जैसे राउंड फिगर्स ट्रेडर्स की साइकोलॉजी पर किसी माइलस्टोन की तरह इम्पैक्ट डालते हैं। इन जगहों पर ज़्यादातर फेक ब्रेकआउट देखने को मिलते हैं। इसलिए ऐसे लेवल्स पर हमें काफी सोच समझकर ट्रेड करनी चाहिए और मार्केट एनालिसिस का नज़रिया हमें अपने हिसाब से नहीं, बल्कि ऑपरेटर माइंडसेट से करना चाहिए।

सही जगह और सही समय पर एंट्री कैसे लें

पॉइंट 1: जब प्राइस किसी इंपोर्टेंट लेवल को बिना समय बिताए सीधा तोड़ दे तो इसके fake breakout होने के चांसेज काफी बढ़ जाते हैं। आपको ऐसी पोज़िशन से बचना चाहिए।

पॉइंट 2: अगर प्राइस ब्रेकआउट से पहले उस लेवल पर रुककर समय बिताए तो ज़्यादातर बार यह एक असली ब्रेकआउट होगा। ऐसे में आप अकॉर्डिंगली ब्रेकआउट ट्रेड ले सकते हो।

पॉइंट 3: ब्रेकआउट के बाद प्राइस के बिहेवियर को भी देखें। अगर प्राइस ब्रेकआउट के बाद उस लेवल पर ज़्यादा समय बिताने लगे तो ब्रेकआउट फेल हो सकता है। ऐसे में दूसरी जगह से कन्फर्मेशन लेकर उल्टी दिशा में ट्रेड लेना ज़्यादा बेहतर रिज़ल्ट दे सकता है।

अपने दिमाग में बैठा लो: अगर मार्केट ब्रेकआउट से पहले कंसोलिडेट करे तो यह रियल ब्रेकआउट हो सकता है; ब्रेकआउट की डायरेक्शन में ट्रेड लो। वहीं पर अगर प्राइस ब्रेकआउट के बाद समय बिताता है तो यह एक फेक ब्रेकआउट हो सकता है।

ट्रेडिंग टिप्स

टिप 1: अगर आप एक बिगिनर हैं तो अपनी पोज़िशन का साइज़ रीज़नेबल और छोटा रखने की कोशिश करनी चाहिए। बिगिनर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि ज़्यादा क्वांटिटी में ज़्यादा प्रॉफिट तो दिला सकती है लेकिन एक बुरा दिन उनके पूरे अकाउंट को ही साफ़ कर देगा।

टिप 2: आपको ट्रेड करते हुए पेशेंस रखनी होगी। अगर आप पेशेंस नहीं रखते हो तो आप सही समय आने से पहले ही ट्रेड में घुस जाओगे। आपको पूरे दिन में सिर्फ एक से दो ही क्वालिटी ट्रेड्स लेने हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों, आज की इस वीडियो में बस इतना ही। अगर आपको हमारी यह वीडियो अच्छी लगी तो वीडियो को लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। मिलते हैं अगली वीडियो में। जय हिंद।

इसपर एक सम्पूर्ण वीडियो देखें: Click Here


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Written by: Ardan Kumar | Founder | aktv.in


डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ शैक्षणिक कार्यों हेतु है। हम SEBI रजिस्टर्ड नहीं हैं। यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस नहीं है। ट्रेडिंग में नुकसान का रिस्क होता है।

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